कबीर

जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप
जहाँ क्रोध तहाँ काल है, जहाँ क्षमा तहाँ आप
– कबीर

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किरदार

महफूज़ रख, बेदाग रख, मैली ना कर ज़िंदगी.
मिलती नहीं इंसान को किरदार की चादर नई..!!